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New Document भारत रतन डॉ बी आर अंबेडकर की 127 वीं जयंती समारोह का उत्सव प्रवेश अधिसूचना: भारतीय सेना कार्मिक (Distance Mode) 2017-2018

 
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प्रोफेसर. तलत अहमद
कुलपति

जामिया मिल्लिया इस्लामिया 1920 में शेख-उल- हिंद मौलाना महमूद हसन, मौलाना मुहम्मद अली जौहर, हकीम अजमल खान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी, जनाब अब्दुल मजीद ख़्वाजा और डॉ. जाकिर हुसैन जैसे संस्थापकों के अथक प्रयासों के माध्यम से अस्तित्व में आया। यह सामान्य लोगों के और मुसलमानों के सामाजिक-आर्थिक जीवन में परिवर्तन लाने के लिए और विशेष रूप से शिक्षा के माध्यम से परिवर्तन लाने के लिए इन महान स्वप्नदर्शियों की बेहिचक और दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया की अलग पहचान को डॉ. जाकिर हुसैन साहब ने अर्थपूर्ण अंदाज़ में स्पष्ट किया है:

"जामिया मिल्लिया इस्लामिया का आंदोलन शिक्षा और सांस्कृतिक नवजागरण के लिए एक संघर्ष है। यह भारतीय मुसलमानों के लिए एक खाका तैयार करेगा जो इस्लाम पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ आम भारतीय के लिए एक राष्ट्रीय संस्कृति विकसित करेगा। यह इस विचार की बुनियाद रखेगा कि वास्तविक धार्मिक शिक्षा भारतीय मुसलमानों में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय सद्भावना को बढ़ावा देगी और जो भारत के भावी विकास में भाग लेकर गौरवान्वित होंगे जोकि शांति और विकास के लिए राष्ट्रों के समुदाय में अपनी भूमिका निभायेगा| जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना का उद्देश्य भारतीय मुसलमानों के लिए भावी चुनौतियों को देखते हुए साँझा कार्यक्रम तैयार करना है और बच्चों को भविष्य का उस्ताद बनने के लिए तैयार करना है|”

इस महान संस्थान के संस्थापकों का मिशन केवल एक दीपस्तम्भ के प्रकाश के रूप में सभी हितधारकों की सेवा ही नहीं है, बल्कि हमें इस विश्वविद्यालय को दुनिया में उच्च शिक्षा के प्रमुख संस्थानों में से एक के रूप में स्थापित करने के लिए प्रेरित करना भी है। इसे समसामयिक अधिगम अनुभवों, अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा मानदंड, बौद्धिक स्वतन्त्रता और वर्तमान समय से सम्बन्धित प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक अनुसन्धान के अवसर प्रदान करने का गौरव प्राप्त करना चाहिए|

आज, जब विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के बाद से एक लंबा रास्ता तय कर चुका है, इसे समाज की बदलती जरूरतों और अपेक्षाओं के साथ तालमेल बनाये रखने की आवश्यकता है। इसे नए ज्ञान के विस्तार, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक विकास, सामाजिक सम्बद्धता, समानता और न्याय के संवर्धन के लिए एक बुद्धिमान मानव संसाधन समूह तैयार करने की नई क्षमताएँ विकसित करने में अपनी भूमिकाओं का सफलतापूर्वक निर्वाह करना है|

देश में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की विशेष स्थिति को देखते हुए, हमें जामिया में विकल्प-आधारित क्रेडिट प्रणाली एवं उपयुक्त परीक्षा प्रणाली को लागू करते हुए शैक्षिक पाठ्यक्रमों की पुनर्रचना और प्रशासनिक सुधार हेतु अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा मानकों, जैसे साइटेशन इंडेक्स एवं जनरल इम्पेक्ट फेक्टर इत्यादि को अपनाए जाने की आवश्यकता है| जिससे हमारे अनुसंधानों की गुणवत्ता का मूल्यांकन हो सके| मैं सभी संकाय सदस्यों से, व्यक्तिगत या किसी अन्य शोधकर्त्ताओं के साथ मिलकर अनुसंधान परियोजनाओं को तैयार करने या विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से आर्थिक समर्थन प्राप्त करने का आह्वान करता हूँ।

शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को मजबूत बनाने के अलावा, अनुसंधान और विस्तार कार्यक्रमों, पाठ्येतर गतिविधियों पर विशेष ध्यान, खेल और अन्य समान गतिविधियों में छात्रों की वैश्विक दक्षताओं को बढ़ावा देना भी हमारी प्राथमिकता है।

आइए हम इस संस्था के विकास को बढ़ावा देने और इसे छात्रों की पहली पसंद बनाने के लिए सामूहिक और व्यवस्थित रूप से कार्य करें।